प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार भले ही अंग्रेजी कैलेंडर को आधिकारिक मान्यता नहीं देती, लेकिन शिक्षा व्यवस्था और समाज में वही सबसे अधिक प्रचलित है. इससे भारतीय संस्कृति और परंपराओं पर नकारात्मक असर पड़ रहा है. अंग्रेजी नववर्ष भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है, फिर भी उसे बड़े स्तर पर मनाया जाता है. इससे धार्मिक परंपराएं और सामाजिक एकता कमजोर हो रही हैं.
संगठनों ने मांग की कि भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को आधिकारिक मान्यता दी जाए. विक्रम संवत को शिक्षा व सामाजिक जीवन में स्थान दिया जाए. ताकि भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को मजबूती मिल सके.इस दौरान राष्ट्रीय हिंदु संगठन के अध्यक्ष ब्रजेश सिंह, चंद्र किशोर साहु, राजू सिंह,विकास सिंह समेत अन्य शामिल थे.


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