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प्रखंड क्षेत्र के प्रचलित मोरडीहा ग्राम में विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी वार्षिक गणेश पूजा

ठाकुर गंगटी(गोड्डा) प्रखंड क्षेत्र के प्रचलित मोरडीहा ग्राम में विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी वार्षिक गणेश पूजा सह भागवत कथा समारोह काफी धूमधाम से मनाई जा रही है।कार्यक्रम को ले शनिवार को भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। मोरडीहा दुर्गा मंदिर सह गणेश पूजा भागवत कथा सप्ताह समारोह आयोजन स्थल से झंडा, बैनर,ढोल,बाजे,रथ, 1001 कलश यात्री साथ आयोजन स्थल से निकलने के बाद कलश यात्रा के साथ कमराचक,बगीचाटोला, मोरडीहा होते हुए कलश यात्रा बिहारी गांव के बाहर शिव मंदिर तालाब के निकट पहुंची।वहां शिव मंदिर तालाब में कलश में जल भरने के बाद बिहार पैरनराय कित्ता,पारसी चौक मोड, बजरंगबली चौक मोड, शीतला माता मंदिर, बजरंगबली मंदिर,काली माता मंदिर सहित अन्य देवी,देवताओं का मंदिर होते हुए वापस कलश यात्रा कथा मंडप के निकट पहुंची।वहां कथावाचक अभ्यानंद उर्फ अभिषेक शास्त्री जी महाराज द्वारा मंत्रोच्चारण के माध्यम से विधिवत कलश की पूजा करने के बाद कलश स्थापित कराया गया। दोपहर में गणेश भगवान की पाठ पूजा कराई गई। संध्या 5:00 बजे से दुर्गा मंदिर,गणेश प्रतिमा के समक्ष धार्मिक मंच से कथावाचक अभयानंद उर्फ अभिषेक शास्त्री जी महाराज द्वारा भागवत कथा प्रारंभ की गई।कथा पंडाल में हजारों श्रद्धालुओं ने शांति, सद्भावपूर्ण वातावरण में भागवत कथा को सुना और बीच-बीच में भजन कीर्तन के साथ-साथ ताली बजाकर झूमते हुए कई श्रद्धालुओं ने नृत्य भी किया।कथावाचक द्वारा प्रथम दिन कथा की सारांश को बताया गया। कहा की भागवत कथा करना,करना,सुनाना तो अति आवश्यक है ही। लेकिन भागवत कथा सुनने मात्र से मनुष्य को बैकुंठ और मोक्ष की प्राप्ति होती है।बताया कि पुराने समय में सूत जी महाराज द्वारा हरिद्वार के घाट पर शौनक जी ऋषि मुनि को भागवत कथा सुनाया था।फिर सोनकादि ऋषि ने नारद और भक्ति के पुत्रों को प्राचीन काल में यही कथा सुनाई थी। सोनकादि ऋषि ने ही प्राचीन आत्मदेव का इतिहास नारद को बताया।जिसमें गौकर्ण जी महाराज ने अपने भाई धुंधकारी को भागवत कथा सुनवाई थी।क्योंकि धुंधकारी अपने कुकर्मों के चलते प्रेत योनि में चला गया था और रात्रि में आकर गोकर्ण को डरा रहा था। उन्होंने कारण जानना चाहा तो प्रेत धुंधकारी ने कहा कि उसे मुक्ति नहीं मिली है वह प्रेत योनि में चला गया है।धुंधकारी ने कहा कि भागवत कथा सुनने मात्र से उसे मुक्ति मिल सकती है।तब गौकर्ण ने धुंधकारी को भागवत कथा सुनवाई। धुंधकारी ने बांस के अंदर प्रवेश कर सातों दिन भागवत कथा सुनी प्रत्येक दिन बारी-बारी से एक-एक करके सातवें दिन बांस का सातों बिट्टा फट गया।इस प्रकार धुंधकारी को मुक्ति मिली।इसलिए भागवत कथा प्रत्येक मनुष्यों का जीवन के लिए अति लाभकारी है।इस कार्य में आयोजक सह युवा शक्ति संघ के सभी पदाधिकारी,सभी सदस्य के साथ-साथ मोरडीहा ग्राम पंचायत के मोरडीहा,बिहारी, कमराचक गांव के सभी नवयुवक,बुजुर्ग, गणमान्य,शिक्षाविद सहित संपूर्ण पंचायत वासी सहयोग कर रहे हैं।

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