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सिद्धकोफेड द्वारा बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के सशक्तिकरण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

सिद्धकोफेड द्वारा बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के सशक्तिकरण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न...

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सहकारी समितियाँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती- उपायुक्त, बोकारो...

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मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, सिद्धो–कान्हो कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लिमिटेड (SIDDCOFED), रांची के निर्देश के आलोक में जिले में सिद्धकोफेड के द्वारा बहुउद्देशीय सहकारी समितियाँ (MPCS) के सशक्तिकरण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया

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आज दिनांक 09 अक्टूबर, 2025 को मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, सिद्धो–कान्हो कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लिमिटेड (SIDDCOFED), रांची के निर्देश के आलोक में जिले में सिद्धकोफेड के द्वारा बहुउद्देशीय सहकारी समितियाँ (MPCS) के सशक्तिकरण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में आयोजित किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ उपायुक्त श्री अजय नाथ झा द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। मौके पर उप विकास आयुक्त श्रीमती शताब्दी मजूमदार, अपर समाहर्ता मो मुमताज अंसारी, जिला सहकारिता पदाधिकारी श्री ऋतुराज प्रसाद, जिला खेल पदाधिकारी श्रीमती हेमलता बुन, डीडीएम नाबार्ड श्री फिलोमन बिलुंग, सिद्धकोफेड के प्रतिनिधि श्री रंजीत गुप्ता, विभिन्न प्रखंडों की बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के अध्यक्ष एवं सचिव सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। कार्यशाला में उपायुक्त श्री अजय नाथ झा ने सभी समितियां से अपील की कि वह राज्य एवं केंद्र सरकार की सहकारी योजनाओं का लाभ लें और अपने कार्य क्षेत्र का विस्तार करें। साथ ही उन्होंने आगे कहा कि जिला प्रशासन हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि सहकारी समितियां आत्मनिर्भर और सशक्त बना सके।

वहीं, सिद्धकोफेड के प्रतिनिधियों ने कार्यशाला में सहकारी समितियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, ऋण सुविधा, विपणन, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। साथ ही सफल सहकारी समितियों के उदाहरण प्रस्तुत कर अन्य समितियों को प्रेरित किया गया।

सहकारी समितियाँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती हैं -

कार्यशाला में उपायुक्त श्री अजय नाथ झा ने कहा कि सहकारी समितियाँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती हैं और इनके सशक्त होने से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक प्रगति होगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने समितियों के पारदर्शी संचालन, लेखा-जोखा के डिजिटलीकरण एवं सदस्य जागरूकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने सिद्धकोफेड समितियों के पदाधिकारियों एवं सदस्यों से कहा कि नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और परामर्श उपलब्ध कराए, जिससे समितियाँ अधिक कुशल एवं आत्मनिर्भर बन सकें।

ग्रामीणों को उचित मूल्य मिल सके-

सिद्धकोफेड के प्रतिनिधि श्री रंजीत गुप्ता ने कहा कि बहुउद्देशीय सहकारी समितियाँ किसानों, ग्रामीण कारीगरों एवं स्व–सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इसके लिए राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न सहकारी योजनाओं से समितियों को जोड़ने से उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि MPCS समितियों को ऋण सुविधा, कृषि उत्पादों के विपणन, भंडारण एवं प्रसंस्करण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए ताकि ग्रामीणों को उचित मूल्य मिल सके। 

कार्यशाला के दौरान विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा वित्तीय प्रबंधन, सदस्य सहभागिता, लेखा प्रणाली, प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम का समापन संबोधन जिला सहकारिता पदाधिकारी ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया।

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