झारखंड के ग्रामीण क्षेत्र की रहने वाली महिला कलाकार भारती देवी ने यह साबित कर दिया है कि कला कभी खत्म नहीं होती, उसे बस एक अवसर और सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है। लगभग 50 वर्ष की उम्र में आज वे फिर से अपनी कला यात्रा को नई पहचान दे रही हैं।
भारती देवी के पति का नाम बिहारी सिंह मुंडा है और उनके बेटे दुखहरन सिंह मुंडा भी पेंटिंग कला से जुड़े हुए हैं। परिवार में कला का वातावरण हमेशा रहा, लेकिन शादी और जिम्मेदारियों के बाद भर्ती देवी की अपनी कला कहीं पीछे छूट गई थी।
“Mission #Artist_Village_Chirudih” के संस्थापक युवा कलाकार मनीष महतो के साथ जुड़ने के बाद भारती देवी ने दोबारा पेंटिंग बनाना शुरू किया। एक दिन बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वे कढ़ाई का काम भी जानती हैं। जब मनीष महतो ने उनका पुराना कढ़ाई किया हुआ काम देखा, तो उस पर सुंदर अक्षरों में लिखा था
**“कला ही जीवन है”**
जब उनसे पूछा गया कि यह कढ़ाई कब बनाई थी, तब उन्होंने भावुक होकर बताया कि यह उन्होंने अपनी शादी से पहले बनाई थी। यह सुनकर मनीष महतो भी भावुक हो गए, क्योंकि इससे साफ पता चलता है कि बचपन और युवावस्था से ही उन्हें कला से कितना गहरा लगाव था।
लेकिन शादी के बाद घरेलू जिम्मेदारियों के कारण उनका यह सपना धीरे-धीरे छूट गया। इसके बाद मनीष महतो ने उन्हें फिर से अपनी कला जारी रखने के लिए प्रेरित किया। बाद में उन्हें कोलकाता में आयोजित एक कला कार्यशाला में भी ले जाया गया, जहाँ उन्होंने अपनी प्रतिभा को नए रूप में प्रस्तुत किया।
आज भारती देवी लगातार पेंटिंग और कढ़ाई के माध्यम से अपनी पहचान बना रही हैं। उनकी कहानी गांव की उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को भूल चुकी हैं।
युवा कलाकार मनीष महतो का कहना है कि गांव की पारंपरिक कला और महिलाओं की प्रतिभा को आगे लाना ही उनके मिशन का उद्देश्य है। वहीं भारती देवी कहती हैं
“अगर मन में लगन हो, तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। कला आज भी मेरे जीवन का सबसे बड़ा हिस्सा है।”
भारती देवी की यह यात्रा सिर्फ एक कलाकार की वापसी नहीं, बल्कि गांव की महिलाओं के आत्मविश्वास और सपनों की नई शुरुआत की कहानी बन चुकी है।


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