भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर का रंगारंग समापन, विद्यार्थियों ने प्रस्तुत की संथाली संस्कृति की मनमोहक झलक
*स्थानीय पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, गोड्डा में आयोजित भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर का उत्साह, उमंग एवं सांस्कृतिक रंगों के बीच भव्य समापन हुआ। 13 मई 2026 से प्रारंभ हुए इस शिविर में विद्यार्थियों ने संथाली भाषा, लोक संस्कृति, पारंपरिक जीवन शैली तथा जनजातीय विरासत से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। समापन समारोह में छात्र-छात्राओं की आकर्षक प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।*
*कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात संथाली भाषा विशेषज्ञ एवं कवि मेरुलाल टूडू तथा संथाली भाषा विशेषज्ञ रामप्यारे सोरेन उपस्थित रहे। समारोह का शुभारंभ पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य रजनीश कमल, पीजीटी अंग्रेजी अल्बेनूस मरांडी, पीजीटी जीव विज्ञान मो. इफ्तेखार आलम सहित अन्य शिक्षकों एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।*
*समापन समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने संथाली भाषा में कविता पाठ, भाषण, संवाद प्रस्तुति एवं पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत संथाली लोकगीतों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को जनजातीय संस्कृति के रंग में रंग दिया। पारंपरिक वेशभूषा में विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां समारोह का विशेष आकर्षण रहीं।*
*इस अवसर पर मुख्य अतिथि मेरुलाल टूडू ने कहा कि भारतीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक अस्मिता एवं पहचान की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा, लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यालय द्वारा आयोजित इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिविर विद्यार्थियों में भाषा के प्रति सम्मान एवं सांस्कृतिक चेतना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।*
*वहीं रामप्यारे सोरेन ने विद्यार्थियों को संथाली भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय भाषाएं एवं संस्कृतियां हमारी अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।*
*विद्यालय के प्राचार्य रजनीश कमल ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय भाषाओं एवं स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस शिविर का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में भाषा सीखने के प्रति बढ़ती रुचि एवं उत्साह इस शिविर की सफलता का प्रमाण है।*
समारोह के अंत में शिविर में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। अभिभावकों एवं अतिथियों ने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, भाषा ज्ञान एवं सांस्कृतिक प्रस्तुति की मुक्त कंठ से सराहना की।*
*विद्यालय परिवार ने इस शिविर को भारतीय भाषाओं के संरक्षण, जनजातीय संस्कृति के संवर्धन तथा विद्यार्थियों में सांस्कृतिक जागरूकता विकसित करने की दिशा में एक सफल एवं प्रेरणादायी पहल बताया।


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