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नेशनल सिविल सर्विसेज डे पर समाहरणालय में कार्यक्रम का हुआ आयोजन

नेशनल सिविल सर्विसेज डे पर समाहरणालय में कार्यक्रम का हुआ आयोजन

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कर्तव्य पथ पर जो भी मिले, यह भी सही - वह भी सही..., सेवा - समर्पण और संतुलन का दिया संदेश

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मंगलवार को नेशनल सिविल सर्विसेज डे के अवसर पर समाहरणालय स्थित उपायुक्त कार्यालय कक्ष में एक सादे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपायुक्त (डीसी) श्री अजय नाथ झा, उप विकास आयुक्त श्रीमती शताब्दी मजूमदार, अपर समाहर्ता मो. मुमताज अंसारी, एसडीओ सुश्री प्रांजल ढ़ांडा, डीसीएलआर श्री प्रभाष दत्ता, डीएसओ श्रीमती शालिनी खालखा, उत्पाद अधीक्षक श्री संजय मेहता, डीपीओ श्री राज शर्मा, जिला खनन पदाधिकारी श्री रवि कुमार सहित जिले के विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मियों ने सहभागिता की। इस अवसर पर सिविल सेवाओं के महत्व, उनकी जिम्मेदारियों तथा आमजन के प्रति उत्तरदायित्व पर विस्तार से चर्चा की गई।

ब्रिटिश काल से आधुनिक प्रशासन तक की भूमिका पर प्रकाश

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त (डीसी) श्री अजय नाथ झा ने कहा कि आजादी से पूर्व सिविल सेवाओं को आईसीएस कहा जाता था। स्वतंत्रता के बाद भारत ने मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की। उन्होंने ब्रिटिश शासनकाल में जिलादंडाधिकारी की कार्यशैली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उस समय अधिकारी लगातार क्षेत्र भ्रमण कर लोगों की समस्याएं सुनते और समाधान करते थे।

पारदर्शिता - जवाबदेही और संवेदनशीलता पर जोर

उपायुक्त ने कहा कि सिविल सेवा केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि जनसेवा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। सिविल सेवकों का कर्तव्य है कि वे शासन की योजनाओं और नीतियों को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं। उन्होंने अधिकारियों को अपने कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संवेदनशीलता बनाए रखने का आह्वान किया।

समन्वय और टीम वर्क से ही बेहतर प्रशासन संभव

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्यों में समन्वय और टीम वर्क अत्यंत आवश्यक

 है। सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ कार्य करें। साथ ही अधिकारियों को अपने व्यक्तित्व का विकास करने, डायरी लेखन एवं पठन-पाठन की आदत अपनाने तथा पूर्वाग्रह से मुक्त होकर कार्य करने की सलाह दी। कहा कि कर्तव्य पथ पर जो भी मिले, यह भी सही - वह भी सही...

सेवक भाव से कार्य करने की आवश्यकता: डीडीसी

मौके पर उप विकास आयुक्त (डीडीसी) श्रीमती शताब्दी मजूमदार* ने कहा कि सिविल सेवा में कार्य करते समय *सेवक की भावना सर्वोपरि होनी चाहिए। पद, सुविधा या स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं करना चाहिए। जहां भी *दायित्व मिले, उसे पूरी निष्ठा से निभाना चाहिए।

जन सुनवाई में संवेदनशीलता जरूरी: अपर समाहर्ता

मौके पर अपर समाहर्ता मो. मुमताज अंसारी ने कहा कि प्रशासन में आने का उद्देश्य सेवा देना है। आमजन की बातों को धैर्यपूर्वक सुनना चाहिए, क्योंकि वे उम्मीद और विश्वास के साथ अपनी समस्या लेकर आते हैं।

सिविल सेवा स्टील फ्रेम, सभी की भूमिका महत्वपूर्ण: एसडीओ

मौके पर एसडीओ चास सुश्री प्रांजल ढांडा ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल के अनुसार सिविल सेवा देश का स्टील फ्रेम है। इसमें केवल अधिकारी ही नहीं, बल्कि सभी कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

टीम वर्क और जनसंतुष्टि पर बलः डीसीएलआर

मौके पर डीसीएलआर चास श्री प्रभात दत्ता ने कहा कि आम लोगों को अधिकारियों से मिलकर संतुष्टि मिलती है, इसलिए टीम वर्क के साथ कार्य करना आवश्यक है। वहीं, डीएसओ शालिनी खालखो ने कहा कि सिविल सेवा में प्रतिष्ठा और गरिमा है, और सभी को निष्पक्ष भाव से कार्य करना चाहिए।

जनहित में कार्य करने का लिया संकल्प

अंत में सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों ने जनहित में कार्य करने, बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ करने का संकल्प लिया।


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