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वासेपुर_का_सच #धनबाद #वासेपुर के #फहीम_खान की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर !!

#वासेपुर_का_सच  #धनबाद #वासेपुर के #फहीम_खान की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर !!

ताउम्र कैद की सजा काट रहे वासेपुर के  फहीम खान की रिहाई पर सुप्रीम मुहर लग गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया, जिसमें फहीम खान को रिहा करने का आदेश राज्य सरकार को दिया गया था। उच्च न्यायालय के इसी फैसले के विरुद्ध सरकार ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच में शामिल जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस महादेवन ने राज्य सरकार के वकील जयंत मोहन और फहीम खान के सीनियर वकील अजीत कुमार सिन्हा की दलीलों को सुनने के बाद शीर्ष कोर्ट ने सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी। सात नवंबर 2025 को फहीम की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल कुमार चौधरी ने सरकार को छह सप्ताह के अंदर फहीम खान को जेल से रिहा करने का आदेश दिया था। लेकिन, समयसीमा खत्म होने के बाद भी फैसले का पालन नहीं किया। फहीम ने हाईकोर्ट में अवमानना का केस दर्ज किया है। इससे पहले नौ फरवरी को सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।

झारखंड सरकार को झटका
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से झारखंड सरकार को बड़ा झटका लगा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अब जल्द ही फहीम खान जेल से बाहर आएगा। इधर, फैसला आने के बाद राज्य सरकार सभी कानूनी विकल्प पर विचार कर रही है।

17 साल से सलाखों के पीछे है फहीम खान
फहीम खान 17 सालों से सलाखों के पीछे ताउम्र कैद की सजा काट रहा है। वह फिलहाल जमशेदपुर की घाघीडीह जेल में बंद है। 10 मई 1989 को वासेपुर में सगीर हसन सिद्दीकी की सिर में गोली मारकर हत्या हुई थी। 15 जून 1991 को धनबाद सेशन कोर्ट ने सगीर की हत्या में फहीम सहित तीन आरोपियों को बरी कर दिया था। तत्कालीन बिहार सरकार ने मामले को उच्च न्यायालय पटना में चुनौती दी थी।

इससे पहले पटना हाईकोर्ट ने 13 अप्रैल 2000 को सेशन कोर्ट की रिहाई के फैसले पर स्टे लगाते हुए सेशन कोर्ट को फैसले पर पुनर्विचार करते हुए नया आदेश पारित करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 12 मई 2001 को हाईकोर्ट को स्वयं केस का रिव्यू कर मेरिट के आधार पर फैसला सुनाने का आदेश दिया था। वर्ष 2009 में हाईकोर्ट ने फहीम खान को सगीर की हत्या का दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी। उसी समय सरेंडर करने के बाद से फहीम खान जेल में बंद है। 21 अप्रैल 2011 को हाईकोर्ट के फैसले को सही मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मरते दम तक फहीम खान को जेल में रखने की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा था
सात नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने अपने आदेश में लिखा था कि रिव्यू बोर्ड ने रिमिशन सेंटेंस में संशोधित नीति 2007 को आधार मानकर फहीम की रिहाई से मना किया था, जबकि सगीर हत्याकांड का फैसला सत्र न्यायालय में 15 जून 1991 को ही आ गया था, इसलिए फहीम खान पर सजा में छूट की 1984 वाली नीति लागू होनी चाहिए। वर्ष 2007 में बनी पॉलिसी फहीम खान के मामले में लागू नहीं होती है।

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