तेनुघाट --- बेरमो अनुमंडल स्थित साडम के बंगाली टोला में बेरमो अनुमंडल स्थित साडम के बंगाली टोला में बिपत्तरिणी पूजा बड़ी ही धूम धाम से मनाया गया। इस पूजा में सैकड़ो महिलाये फल और पकवान के साथ माँ काली(दुर्गा)के मंदिर में पहुंची पूजा बड़ी ही धूम धाम से मनाया गया। इस पूजा में सैकड़ो महिलाये फल और पकवान के साथ माँ काली के मंदिर में पहुंची।
इस बारे में पुजारी मोहितोष चक्रवर्ती ने बताया कि विपदतारिणी (या बिपत्तरिणी) माता, देवी दुर्गा का ही एक रूप हैं। उनका नाम 'विपदा' (संकट) और 'तारिणी' (मुक्ति दिलाने वाली) से मिलकर बना है, जो भक्तों को सभी प्रकार के संकटों से बचाती हैं। यह व्रत और पूजा विशेष रूप से पूर्वी भारत पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और झारखंड में महिलाओं द्वारा की जाती है। यह पूजा हर साल रथ यात्रा (द्वितीया) और उल्टे रथ (दशमी) के बीच पड़ने वाले पहले मंगलवार या शनिवार को की जाती है।माता को 13 प्रकार के फल, 13 प्रकार के फूल और 13 तरह की मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।इस पूजा में 13 गांठों वाला लाल पवित्र धागा कलाई या बांह में बांधा जाता है। पूजा के दौरान पंडित जी द्वारा 'विपदतारिणी व्रत कथा' सुनी और सुनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि यह व्रत रखने और पूजा करने से परिवार की सभी विपत्तियां दूर होती हैं, पति की लंबी उम्र और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।




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