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डीसी ने माननीय उच्च न्यायालय के अवमानना से संबंधित वादों का किया समीक्षा

डीसी ने माननीय उच्च न्यायालय के अवमानना से संबंधित वादों का किया समीक्षा

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कुल 33 मामलों पर की समीक्षा, प्रत्येक 15 दिन पर ऐसे वादों की प्रगति का डीडीसी को समीक्षा का दिया निर्देश

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न्यायालय के मामलों में गंभीरता बरतने, एसओएफ दाखिल करने में समयबद्धता का करें अनुपालन

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समाहरणालय सभागार में उपायुक्त (डीसी) श्री अजय नाथ झा ने की बैठक, सबों को दिया अहम दिशा – निर्देश

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शनिवार को समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त (डीसी) श्री अजय नाथ झा ने विभिन्न विभागों से संबंधित माननीय उच्च न्यायालय के अवमानना के कुल 33 लंबित वादों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सभी संबंधित विभागीय पदाधिकारियों से मामलों की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। मौके पर उप विकास आयुक्त (डीडीसी) श्रीमती शताब्दी मजूमदार, अपर समाहर्ता (एसी) मो. मुमताज अंसारी, प्रभारी पदाधिकारी (विधि शाखा) श्रीमती शालिनी खालको, विभिन्न संबंधित विभागों के पदाधिकारी आदि उपस्थित थे।

प्रत्येक 15 दिन पर प्रगति समीक्षा का दिया निर्देश

उपायुक्त ने मौके पर उपस्थित उप विकास आयुक्त (डीडीसी) को निर्देश दिया कि ऐसे वादों की प्रगति की समीक्षा प्रत्येक 15 दिन पर नियमित रूप से की जाए, ताकि समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जा सके।

न्यायालयीन मामलों में गंभीरता बरतने का निर्देश

उपायुक्त ने सभी पदाधिकारियों को न्यायालयीन मामलों के प्रति पूर्ण गंभीरता बरतने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि न्यायालय से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही/सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

एसओएफ दाखिल करने में समयबद्धता सुनिश्चित करें

बैठक में उपायुक्त ने स्टेटमेंट ऑफ फैक्ट (एसओएफ) दाखिल करने में हो रही देरी पर चिंता जताई और निर्देश दिया कि सभी विभाग निर्धारित समयसीमा के भीतर एसओएफ दाखिल करना सुनिश्चित करें।

विभागीय समन्वय को मजबूत बनाने पर जोर

उपायुक्त ने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल दिया, ताकि न्यायालयीन मामलों के निष्पादन में तेजी लाई जा सके।

बैठक में उपस्थित सभी विभागों के पदाधिकारियों ने अपने-अपने मामलों की अद्यतन जानकारी प्रस्तुत की। इस क्रम में अवमानना के अतिरिक्त विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 136 मामले लंबित पाएं गए। जिस पर उपायुक्त ने निर्देश दिया कि न्यायालय से संबंधित सभी मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।

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