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जल-जंगल-जमीन, शिक्षा और भूमि अधिकार की रक्षा के लिए जनता की हुंकार – अब नहीं सहेंगे अन्याय


केरेड़ारी में भूमि अधिकार एवं सामाजिक न्याय समिति का ऐतिहासिक महाधरना सम्पन्न

"जल-जंगल-जमीन, शिक्षा और भूमि अधिकार की रक्षा के लिए जनता की निर्णायक हुंकार – अब नहीं सहेंगे अन्याय"

भूमि अधिकार एवं सामाजिक न्याय समिति के तत्वावधान में शुक्रवार को केरेड़ारी अंचल कार्यालय परिसर में जनसैलाब उमड़ पड़ा। जल-जंगल-जमीन, शिक्षा, भूमि अधिकार, पर्यावरण संरक्षण एवं क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित एकदिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन में हेंदेगीर, लोहरसा, बड़की मेड़ी, छोटकी मेड़ी, कोले, बुचाडीह, बुंडू, खपिया, बटुका, हफुआ, बराडीह, बन्हे, कारों, करमटांड़, मंडर सहित अनेक गांवों से हजारों ग्रामीण, किसान, महिलाएं, युवा एवं जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

सभा की अध्यक्षता समिति के मुख्य संरक्षक  दर्शन गंझू ने तथा संचालन  गणेश कुमार भोक्ता ने किया।

समिति के संयोजक  विकास कुमार महतो ने कहा कि "शिक्षा किसी सरकार की कृपा नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार है। हेंदेगीर हाई स्कूल परिसर में पुलिस कैंप संचालित होने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। विद्यालय में भय और असुरक्षा का वातावरण शिक्षा के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। पुलिस कैंप को तत्काल हटाकर विद्यालय को +2 में अपग्रेड किया जाए, ताकि पाताल, बुंडू, किचटो, बचरा, आंगो, छापर, सुमू एवं आसपास के हजारों छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा से वंचित न होना पड़े।"

उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, पहचान, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य हैं। बुंडू कोल ब्लॉक (एसएम स्टील कंपनी लिमिटेड) एवं पाताल ईस्ट कोल ब्लॉक (आरसीआर स्टील लिमिटेड) का अधिकांश भाग घने वन क्षेत्र एवं हाथी कॉरिडोर में स्थित है। यहां प्रस्तावित खनन से कोंती एवं मालादह जैसी सदाबहार नदियों का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा तथा दामोदर नदी, जैव विविधता, वन्यजीवों और हजारों ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ेगा। इसलिए इसपर विचार करते हुए बुंडू व पताल ईस्ट कोल ब्लॉक रद्द किया जाए.

उन्होंने कहा, "जंगल कटेंगे तो जलस्रोत सूखेंगे, जलस्रोत सूखेंगे तो खेती उजड़ेगी, खेती उजड़ेगी तो गांव उजड़ेंगे। इसलिए जंगल बचाना ही जीवन बचाना है। आज जंगल बचाइए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को ऑक्सीजन खरीदने की नौबत न आए।"

सभा को संबोधित करते हुए आजादी बचाओ आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. मिथिलेश कुमार दांगी ने कहा कि आज जिस प्रकार पानी बोतलों में बिक रहा है, उसी प्रकार अंधाधुंध जंगलों की कटाई भविष्य में ऑक्सीजन को भी व्यापार की वस्तु बना देगी। उन्होंने कहा कि तथाकथित विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन मानव सभ्यता के लिए गंभीर खतरा है। प्रकृति की रक्षा ही मानव जीवन की सुरक्षा है।

धरना में उपस्थित वक्ताओं ने जोरदार मांग की कि हेंदेगीर हाई स्कूल से पुलिस कैंप तत्काल हटाया जाए, विद्यालय को +2 में अपग्रेड किया जाए, प्रत्येक पंचायत में विशेष शिविर लगाकर भूमि अभिलेखों की त्रुटियों का त्वरित सुधार किया जाए तथा बाहरी लोगों के नाम पर हुई संदिग्ध एवं अवैध भूमि बंदोबस्ती की उच्चस्तरीय जांच कर उसे तत्काल निरस्त किया जाए।

किचटो एवं बचरा पंचायत के ग्रामीणों ने वर्षों पुरानी मांग दोहराते हुए दोनों पंचायतों को केरेड़ारी प्रखंड, हजारीबाग में शामिल करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक एवं प्रशासनिक दृष्टि से उनका स्वाभाविक जुड़ाव केरेड़ारी से है और विकास योजनाओं में लगातार हो रहे भेदभाव को अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

धरना में यह भी मांग उठी कि सभी पंचायतों में सरकारी योजनाओं का समान एवं पारदर्शी वितरण सुनिश्चित किया जाए तथा किसी भी पंचायत के साथ विकास के नाम पर भेदभाव न किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में विकास का अधिकार सभी नागरिकों का समान अधिकार है।

कार्यक्रम में हेंदेगीर के विनोद गंझू, दिनेश गंझू, पाताल पंचायत की मुखिया  नेहा लकड़ा, उपमुखिया अजय कुमार मुंडा, किचटो पंचायत की मुखिया संगीता देवी, प्रतिनिधि अंगद महतो, प्रेम सुंदर लकड़ा, रूपलाल महतो, हीरा महतो, अनिल महतो, महेंद्र महतो, संजय मुंडा, करण मुंडा, अजय उर्फ दिनेश गंझू, पंचायत समिति सदस्य नीतू कुमारी, रविशंकर जायसवाल, बीरेंद्र गंझू, त्रिवेणी गंझू, साधु गंझू, श्रीकांत गंझू, सूरज मुंडा, बिशुन मुंडा, सोमा मुंडा, बलकु करमाली, आनंद गंझू, सुखदेव गंझू, चितामन गंझू, संजय ठाकुर, फागुन गंझु, अनिल कुमार, सहित अनेक जनप्रतिनिधि, वार्ड सदस्य एवं हजारों ग्रामीण उपस्थित रहे।

धरना के उपरांत समिति की ओर से कोयला मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय, शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार तथा अन्य संबंधित विभागों को ज्ञापन भेजने की घोषणा की गई।

अंत में सर्वसम्मति से घोषणा की गई कि यदि जनहित से जुड़े इन मुद्दों पर शीघ्र ठोस एवं सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्र की जनता चरणबद्ध, व्यापक एवं लोकतांत्रिक जनआंदोलन को और तेज करेगी। सभा ने स्पष्ट संदेश दिया कि "जनता अब अपने जल-जंगल-जमीन, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए हर लोकतांत्रिक संघर्ष करने को तैयार है। जनता की आवाज़ को अब अनसुना हीं किया जा सकता।"

अंत में अंचल अधिकारी को ज्ञापन देने के बाद सभा अध्यक्ष दर्शन गंझु जी ने ऐतिहासिक धरना प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए ग्रामीणों, मिडिया बंधुओ, प्रशासनिक अधिकारीयों सबकों  धन्यवाद देते हुए. सभा कि समाप्ति कि घोषणा किया.




 

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