
सलैया के रेल आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन बनकर दर्ज हो गया। वर्षों से बेहतर रेल सुविधाओं और प्रमुख ट्रेनों के ठहराव की मांग कर रहे क्षेत्रवासियों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब जनता संगठित होकर तथ्यों और जनसमर्थन के साथ अपनी बात रखती है तथा लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करती है, तो उसकी आवाज़ को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता।
इसी क्रम में सलैया संघर्ष मोर्चा एवं झारखंड रेल यूजर एसोसिएशन के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने धनबाद रेल मंडल के वरिष्ठ मंडलीय वाणिज्यिक प्रबंधक (Sr. DCM) को स्थानीय नागरिकों के हस्ताक्षरों से युक्त विस्तृत मांगपत्र सौंपा। यह केवल एक ज्ञापन नहीं, बल्कि हजारों रेल यात्रियों की उम्मीदों, परेशानियों और वर्षों से चले आ रहे संघर्ष का सशक्त दस्तावेज़ था।
प्रतिनिधिमंडल ने रेलवे प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं—
- गोड्डा–नई दिल्ली एक्सप्रेस (14049/14050) का सलैया स्टेशन पर नियमित ठहराव,एवं इसका संचालन सप्ताह में 3 दिन करने का प्रस्ताव ।
- हटिया–आसनसोल इंटरसिटी एक्सप्रेस (13513/13514) का सलैया स्टेशन पर ठहराव , एवं आरक्षित कोच को पुनः जोड़ने का प्रस्ताव ।
- कोडरमा–महेशमुंडा पैसेंजर (53365/53366) का मधुपुर जंक्शन तक विस्तार तथा सप्ताह के सभी सातों दिन संचालन।
- न्यू गिरिडीह रेलवे स्टेशन का सौंदर्यीकरण, प्लेटफॉर्म की लंबाई बढ़ाने, पर्याप्त यात्री शेडों का निर्माण ,तथा अन्य आवश्यक यात्री सुविधाओं का विस्तार।
इन मांगों के पूरा होने से गिरिडीह, पचंबा, सलैया तथा आसपास के हजारों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, व्यापार और दैनिक आवागमन की सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा।
जब आंकड़े भी सलैया की पैरवी कर रहे हों…
इस बार प्रतिनिधिमंडल केवल भावनाएं लेकर नहीं पहुंचा, बल्कि आरटीआई के माध्यम से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी।
वित्तीय वर्ष 2022–23 के अनुसार—
- सलैया स्टेशन की यात्री आय – 0.13 करोड़ रुपये
- न्यू गिरिडीह स्टेशन की यात्री आय – 0.06 करोड़ रुपये
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सलैया स्टेशन से रेलवे को न्यू गिरिडीह स्टेशन की तुलना में दोगुने से अधिक यात्री राजस्व प्राप्त हुआ। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि जब यात्री अधिक हैं, राजस्व अधिक है और मांग भी वर्षों पुरानी है, तो फिर प्रमुख ट्रेनों का ठहराव अब तक क्यों नहीं दिया गया?
संघर्ष के साथ जिम्मेदारी भी
सलैया संघर्ष मोर्चा का आंदोलन केवल मांग करने तक सीमित नहीं है। संगठन लगातार "टिकट लेकर यात्रा करें" जनजागरूकता अभियान चला रहा है, ताकि लोग वैध टिकट लेकर यात्रा करें, रेलवे का राजस्व बढ़े और यह संदेश जाए कि क्षेत्र के यात्री अपने कर्तव्यों का भी पूरी ईमानदारी से पालन कर रहे हैं , इसके निमित टीम सलैया संघर्ष मोर्चा आगे भी पर्यावरण हितार्थ सलैया एवं न्यू गिरिडीह स्टेशन परिसर में वृक्षारोपण करने जा रही है।
यही सोच इस आंदोलन को अलग पहचान देती है। यहां केवल अधिकारों की बात नहीं होती, बल्कि जिम्मेदार नागरिक होने का संदेश भी दिया जाता है।
अब रेलवे के निर्णय का इंतजार
वर्षों से आवेदन दिए गए, जनप्रतिनिधियों से मुलाकातें हुईं, हस्ताक्षर अभियान चलाए गए, तथ्य जुटाए गए और हर स्तर पर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी गई। अब एक बार फिर क्षेत्र की जनता की उम्मीदें रेलवे प्रशासन पर टिकी हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या रेलवे प्रशासन जनभावनाओं, आधिकारिक आंकड़ों और हजारों यात्रियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय लेगा?
यदि राजस्व, यात्री संख्या और जनहित—तीनों सलैया के पक्ष में हैं, तो फिर प्रमुख ट्रेनों के ठहराव में देरी का औचित्य क्या है?
यह सिर्फ सलैया की नहीं, जनअधिकार की लड़ाई है
सलैया संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या संगठन का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के रेल यात्रियों के अधिकार, सम्मान और बेहतर रेल सुविधाओं की सामूहिक लड़ाई है।
इस अवसर पर सलैया संघर्ष मोर्चा की ओर से गौतम सोनी एवं मिथिलेश पांडे, तथा झारखंड रेल यूजर एसोसिएशन की ओर से पूजा रत्नाकर, छोटी कुमारी एवं अभिषेक उपस्थित रहे।
इतिहास गवाह है कि जब जनसमर्थन, तथ्य और निरंतर प्रयास एक साथ खड़े होते हैं, तो परिवर्तन अवश्य आता है। सलैया की रेल लड़ाई भी अब उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
जनता की आवाज़, जनसमर्थन की ताकत और तथ्यात्मक दावेदारी—अब सलैया के रेल अधिकारों की लड़ाई निर्णायक मोड़ पर है। संघर्ष जारी है, उम्मीद कायम है और विश्वास है कि ठहराव अति शीघ्र मिलेगा एवं अन्य यात्री सुविधाओं में विस्तार होगा।


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