मानसून के दौरान संक्रामक एवं जलजनित बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए गिरिडीह के सिविल सर्जन बच्चा प्रसाद सिंह ने जिलेवासियों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि थोड़ी-सी लापरवाही डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, डायरिया, टाइफाइड, हैजा, पीलिया और फूड प्वाइजनिंग जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है सिविल सर्जन ने बताया कि लोग हमेशा उबला हुआ, फिल्टर या स्वच्छ पानी ही पिएं। ताजा और गर्म भोजन करें तथा खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, कटे हुए फल, बासी भोजन और दूषित पानी के सेवन से बचें। इसके अलावा उन्होंने कहा कि भोजन बनाने और खाने से पहले तथा शौच के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने की आदत अपनाएं उन्होंने कहा कि बरसात में घरों के आसपास, छत, कूलर, टायर, गमले या अन्य बर्तनों में पानी जमा नहीं होने दें। जमा पानी मच्छरों के पनपने का सबसे बड़ा कारण है। इसलिए मच्छरदानी का प्रयोग करें और आवश्यकता अनुसार मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का उपयोग करें।बरसात के मौसम में सांप निकलने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में खेत, झाड़ियों या जलजमाव वाले स्थानों पर जाते समय जूते पहनें और रात में टॉर्च का उपयोग करें। यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय न गंवाएं। मरीज को शांत रखें और तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाएं, जहां एंटी स्नेक वेनम की सुविधा उपलब्ध है उन्होंने कहा कि तेज बुखार, उल्टी-दस्त, पेट दर्द, अत्यधिक कमजोरी, शरीर पर लाल चकत्ते या रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें सिविल सर्जन ने जिलेवासियों से अपील की कि स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, संतुलित आहार और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाकर बरसात के मौसम में स्वयं और अपने परिवार को स्वस्थ एवं सुरक्षित रखे





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