Translate

समाजिक सुरक्षा बाल संरक्षण इकाई बोकारो के तत्वाधान में बाल संरक्षण से संबंधित जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन।

================================

समाजिक सुरक्षा बाल संरक्षण इकाई बोकारो के तत्वाधान में बाल संरक्षण से संबंधित जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन आजीविका संकुल संगठन भवन, पिण्डाजोरा, चास, बोकारो में

 उप विकास आयुक्त श्रीमती शताब्दी मजूमदार की अध्यक्षता में आयोजित की गई। मौके पर पंचायतों के मुखिया उपस्थित थे। बाल संरक्षण के संबंध में व्यापक जानकारी उपस्थित प्रतिभागियों को दी गई। उप विकास आयुक्त श्रीमति शताब्दी मजूमदार ने कहा कि बाल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता के लिए जनप्रतिनिधियों का सहयोग अपेक्षित है। सामाजिक आर्थिक कारणों से बाल विवाह+ बालिका शिक्षा, हयूमन ट्रैफिकिंग, महिलाओं के आर्थिक स्वालंबन में समस्या उत्पन्न होती है। इसे समाजिक दायित्व के रूप मे ंहम सभी को संकल्प लेते हुए समाप्त करना है। उन्होंने अपने संबोधन में फोस्टर फैमली के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता ह ैताकि घर-घर में लोग इसे समझ व जान सके।

योजना का नाम-

1. पालन-पोषण देखरेख (Foster Care)

ऐसा व्यवस्था, जिसमें एक बच्चे को घर जैसे पारिवारिक माहौल में वैकल्पिक देखभाल के उद्दश्य से बच्चों को असंबंधित परिवार के सदस्यों के साथ देखभाल और संरक्षण के लिए रखा जाता है।

2. प्रायोजन Sponsorship

ऐसी व्यवस्था, जिसमें बच्चों को उनके जैविक परिवार से अलग होने से रोकना है, इसका उद्देश्य संस्था में रहने वाले या मुक्त कराये गये पीड़ित बच्चे को प्रायोजन के माध्यम से उनके जैविक परिवार में भेजकर पुनर्वासित करने में सहायता करना है।

योजना का लाभ किसको मिलेगा :-

(क) 18 साल से कम उम्र के बच्चे

(ख) जिन बच्चों के माता-पिता का देहांत हो गया है अथवा रिश्तेदार द्वारा त्याग दिए गए बच्चे।

(ग) जिन बच्चों के माता-पिता HIV/AIDS जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है।

(घ) एकल माँ के बच्चे।

(ड.) तस्कारी से बचाए गए बच्चे।

(च) बच्चे जिनके माता-पिता जेल में है।

(छ) गैर कानूनी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बच्चे।

प्रायोजन के लिए मानदंड

• 4000 रूपये प्रति बच्चे।

• परिवार की कुल वार्षिक आय 75000/- से अधिक नहीं होनी चाहिए।

• प्रति परिवार अधिकतम 3 बच्चे को लाभान्वित किया जा सकता है।

• लड़कियों को प्राथमिकता ।

बच्चों को अवैध रूप से गोद न लें।

अवैध रूप से गोद लेना तस्करी को बढ़ावा देता है।

देखरेख कर्ता बनें, तस्कर न बनें।

कानूनी रूप से गोद लेने हेतु विस्तृत जानकारी के लिए www.adoptionindia.nic.in पर संपर्क कर सकते हैं।

क्या आपको ऐसे बच्चे मिले हैं-

जिनकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है।

जिनके माता-पिता की कोविड-19 में मृत्यु हो गया है।

संपर्क करें

चाईल्ड लाईन नं०

1098

कृपया ऐसे बच्चों को सीधे गोद न लें और किसी को गोद देने की पेशकश भी न करें।

यह कानूनन अपराध है।

अधिक जानकारी हेतू : www.adoptionindia.nic.in

मौके पर उप विकास आयुक्त श्रीमती शताब्दी मजूमदार, प्रशिक्षु आईएएस श्री अरविंद राधाकृष्णन, एएसपी चास श्री वेदांत शंकर, जिला पंचायतीराज पदाधिकारी श्री शफीक आलम, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्री रवि कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री जगरनाथ लोहरा, प्रखंड विकास पदाधिकारी चास श्री प्रदीप कुमार, डीपीएम जेएसएलपीएस, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी श्रीमती अनिता झा, विभिन्न पंचायतों के मुखिया एवं अन्य उपस्थित थे।


Post a Comment

0 Comments