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धान की सीधी बुआई कम लागत में बंपर पैदावार पाने का बेहतर विकल्प।

कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की कमी, जलवायु परिवर्तन, मजदूरों की कमी एवं बढ़ती उत्पादन लागत किसानों के सामने बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इन समस्याओं से निपटने के लिए किसानों को धान की सीधी बुआई (Direct Seeded Rice-DSR) तकनीक अपनानी चाहिए। यह तकनीक कम लागत में अधिक लाभ एवं बेहतर उत्पादन देने में सहायक है।

जिला कृषि पदाधिकारी, बोकारो मो. शाहिद ने बताया कि परंपरागत धान रोपाई पद्धति में बिचड़ा तैयार करने से लेकर रोपाई एवं कटाई तक काफी श्रम और खर्च की आवश्यकता होती है। वहीं धान की सीधी बुआई तकनीक से पानी, श्रम, ऊर्जा एवं समय की बचत होती है। बदलते जलवायु परिदृश्य एवं गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए यह तकनीक किसानों के लिए अधिक उपयोगी साबित हो रही है।

उन्होंने बताया कि सीधी बुआई के लिए खेत का समतलीकरण आवश्यक है। खेत में पर्याप्त नमी की स्थिति में सीड ड्रिल के माध्यम से बुआई की जानी चाहिए। यदि खेत में खरपतवार की समस्या अधिक हो तो पहले सिंचाई कर खरपतवार उगा लें तथा बाद में जुताई कर नमी की अवस्था में सीड ड्रिल द्वारा बुआई करें। इस विधि में प्रति हेक्टेयर लगभग 30 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है तथा बीज की गहराई 2 से 3 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।

मो. शाहिद ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि धान की सीधी बुआई तकनीक अपनाकर वे उत्पादन लागत में कमी ला सकते हैं तथा समय पर फसल स्थापित कर बेहतर उपज प्राप्त कर सकते हैं। कम खर्च और अधिक लाभ के कारण यह तकनीक वर्तमान समय में किसानों के लिए एक प्रभावी एवं लाभकारी विकल्प बनकर उभर रही है।

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